भाजपा – जदयू में मंत्रीमंडल बटवारे के फार्मूले पर अटका नीतीश मंत्रीमंडल का विस्तार

पटना से लेकर दिल्ली तक नेताओं के बीच कई दौर की वार्ता के बाद भी नीतीश कुमार मंत्रीमंडल के विस्तार की राह अभी साफ नहीं हुआ है| हालांकि मंत्री बनने की राह में खड़े नेताओं को अब और ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा| दोनों ही पार्टी के नेताओं का कहना है की बहुत ही जल्द स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और इसी महीने बिहार मंत्रीमंडल का विस्तार हो जाएगा|

जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू ने पहले ही अपनी पार्टी से मंत्री बनाए जाने वाले नेताओं की सूची तैयार कर ली है| उधर पटना से लेकर दिल्ली तक कई दौर की वार्ता के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से मंत्री बनने वाले नेताओं की सूची भी लगभग तैयार है|

लेकिन असली मामला फंसा है भाजपा – जदयू के बीच मंत्रीमंडल के बटवारे के फार्मूला को लेकर| यानी किस पार्टी से कितने मंत्री बने अभी यह तय नहीं हो पा रहा है| दोनों पार्टियाँ इसको लेकर अभी किसी फार्मूले पर नहीं पहुंची है|

एक तरफ जहाँ भाजपा बदली परिस्थितियों के अनुसार मंत्रीमंडल का बटवारा चाह रही है तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अभी इस यथार्थ को स्वीकार करने में दिक्कत हो रही है की उनकी सरकार में भाजपा अब बड़ी पार्टी बन गयी है|

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाह रहे है की मंत्रीमंडल का बटवारा 50-50 हो यानी भाजपा एवं जदयू के कोटे से बराबर बराबर मंत्री बने| लेकिन भाजपा को यह फार्मूला स्वीकार नहीं है| भाजपा का कहना है की इस बार भी वही फार्मूला हो जो पिछली बार लगा था|

पिछली एनडीए की सरकार में जदयू के मुख्यमंत्री सहित 22 विधायक मंत्री थे| बीजेपी के उपमुख्यमंत्री समेत 13 विधायक मंत्री बने थे| विधानसभा में पिछली बार जदयू के विधायकों की संख्या 71 थी तथा भाजपा के विधायकों की संख्या 54 थी| लेकिन इसबार परिस्थिति बदल गयी है| इसबार भाजपा 74 विधायक हैं और जदयू के 43 विधायक है|

बिहार विधानसभा की कुल संख्या 243 है और विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत सदस्य मंत्री बनाए जा सकते हैं| इस दृष्टि से बिहार में मुख्यमंत्री सहित कुल 36 मंत्री हो सकते हैं|

अब अगर इसबार भी पिछली एनडीए की सरकार का फार्मूला लगता है तो भाजपा के उपमुख्यमंत्री सहित कुल 21 मंत्री हो सकते है और जदयू के मुख्यमंत्री सहित कुल 13 मंत्री हो सकते हैं| इसके अलावा हम और वीआईपी को भी एक-एक मंत्री पद मिलेगा|

यहीं पर सारा मामला अटका हुआ है| भाजपा 50-50 के लिए तैयार नहीं है और जदयू पुराना फार्मूला नहीं चाहती है| बीच का रास्ता निकालने के लिए बातचीत का दौर जारी है|

उधर बिहार में गिरती कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाकर भाजपा ने एक बार फिर गृह मंत्रालय हथियाने की कोशिश शुरू कर दी है|         

 


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