कई देशों में लगाई गई आम की प्रदर्शनी, विदेशो में भी मिलेंगे भारत के रसीले आम

भारतीय आमों के लिए नए बाज़ार एवं ग्राहक तथा विदेशी भी भारतीय रसीले आमों का स्वाद ले सके, इसका प्रयास जारी है| भारत के कई राज्यों में इस बार आम के उत्पादन में वृद्धि दर्ज हुई है। देश में आम का उत्पादन सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में होता है। उत्तर प्रदेश के आम की अलग-अलग वैरायटी सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के लोगों को भी खूब लोकप्रिय है। आम उत्पादक किसानों को लाभ पहुंचाने और आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विश्व के कई देशों में केंद्र सरकार की ओर से प्रयास किये जा रहे है। इसी के तहत वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) The Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग अलग देशो में वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठकें और प्रदर्शनी व उत्सव आयोजित करा रहा है। खुद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने इसकी जानकारी दी|

एपेडा ने यूएई में लगाई आम की प्रदर्शनी

भारत इस सीजन में आम के निर्यात को बढ़ावा देने में सक्षम रहा है। खासतौर पर देश के गैर-पारंपरिक उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों से यह निर्यात सामान्य से ज्यादा हुआ है।

इस पहल के हिस्से के रूप में, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) ने भारतीय दूतावास और आयातक लुलु समूह के सहयोग से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में उत्तर भारत के आम की किस्मों के लिए आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया। उत्तर प्रदेश मंडी बोर्ड के सहयोग से चौसा और लंगड़ा सहित रसदार किस्मों को दुबई में प्रदर्शित किया जा रहा है।

दोहा, कतर में भी आम प्रचार कार्यक्रम किया गया आयोजन

एपेडा ने हाल ही में दोहा, कतर में एक आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया, जहां पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश से जीआई प्रमाणित सहित आम की नौ किस्मों को आयातक फैमिली फूड सेंटर के स्टोर पर प्रदर्शित किया गया।

जिन नौ किस्मों का निर्यात किया गया उनमें जीआई प्रमाणित खिरसापति (मालदा, पश्चिम बंगाल), लखनभोग (मालदा, पश्चिम बंगाल), फाजली (मालदा, पश्चिम बंगाल), दशहरी (मलिहाबाद, उत्तर प्रदेश), आम्रपाली और चौसा (मालदा, पश्चिम बंगाल) और लंगड़ा (नदिया, पश्चिम बंगाल) शामिल हैं।

बहरीन में एक सप्ताह तक हुआ भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम

जून, 2021 में, बहरीन में एक सप्ताह तक चलने वाले भारतीय आम प्रचार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें तीन जीआई प्रमाणित खिरसापति और लक्ष्मण भोग (पश्चिम बंगाल), जरदालु (बिहार) सहित आम के फल की 16 किस्मों को प्रदर्शित किया गया था। बहरीन में समूह के 13 स्टोरों के माध्यम से आम की किस्में बेची गईं। एपेडा पंजीकृत निर्यातक द्वारा आमों को बंगाल और बिहार के किसानों से मंगवाया गया था।

मध्य पूर्व के देशों में आम निर्यात क्षमता को बढ़ावा

हाल ही में, पूर्वी क्षेत्र से विशेष रूप से मध्य पूर्व के देशों में आम निर्यात क्षमता को बढ़ावा देने के लिए, पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से भौगोलिक पहचान (जीआई) प्रमाणित फाजिल आम की किस्म की एक खेप बहरीन को निर्यात की गई थी। एपेडा द्वारा पंजीकृत कोलकाता के डीएम इंटरप्राइजेज द्वारा फाजिल आम की खेप का निर्यात बहरीन के अल जजीरा समूह को किया गया।

दक्षिण कोरिया को आम का निर्यात बढ़ाने के लिए, एपेडा ने भारतीय दूतावास, सियोल और कोरिया में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से पहले एक वर्चुअल खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया था।

इस सीजन में पहली बार, भारत ने आंध्र प्रदेश के कृष्णा और चित्तौड़ जिलों के किसानों से प्राप्त जीआई प्रमाणित बंगनपल्ली और अन्य किस्म के स्वर्णरेखा आमों की 2.5 मीट्रिक टन (एमटी) की खेप दक्षिण कोरिया को भेजी है।

देश के इन राज्यों में होता आम का सबसे अधिक उत्पादन

खाद्य एवं कृषि संगठन के आंकड़ें के मुताबिक, दुनिया में लगभग पांच करोड़ टन आम का उत्पादन होता है, जिसमें से करीब दो करोड़ टन भारत में ही पैदा होता है। भारत में आम को ‘फलों का राजा’ भी कहा जाता है और प्राचीन शास्त्रों में इसे कल्पवृक्ष (इच्छा देने वाला पेड़) कहा गया है। हालांकि भारत के अधिकांश राज्यों में आम के बागान हैं मगर उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक का आम के कुल उत्पादन में एक बड़ा हिस्सा है।

अल्फांसो, केसर, तोतापुरी और बंगनपल्ली भारत से निर्यात की जाने वाली प्रमुख किस्में हैं। आम का निर्यात मुख्य रूप से तीन रूपों में होता है: ताजा आम, मैंगो पल्प और मैंगो स्लाइस।

 


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