81 केस वाले UP में कांवड़ यात्रा स्थगित, 16000 वाले केरल में बकरीद की 3 दिन की छुट

देश में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश में होने वाली वार्षिक कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है| हालांकि इस वर्ष सांकेतिक कांवड़  यात्रा ही होनी थी वह भी कोरोना के सभी नियमों का सख्ती से पालन करते हुए|

शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार एवं कांवड़ संघों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया| कोरोना के खतरे को देखते हुए कांवड़ संघो ने खुद ही कावड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया| कांवड़ संघ के निर्णय के बाद प्रदेश सरकार ने भी कांवड़ यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया|

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सांकेतिक कांवड़ यात्रा की अनुमति देने पर स्वत संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था तथा सोमवार तक इस पर प्रतिबन्ध लगाने के बारे में निर्णय लेने का आदेश दिया था|

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन कोरोना संक्रमण की 100 से भी कम यानी सिर्फ 80 के आसपास मामले आ रहे हैं फिर भी वहां पर सांकेतिक कावड़ यात्रा पर भी रोक लगा दी गई| उस यात्रा पर जिस यात्रा से करोड़ों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई। कांवड़ यात्रा को स्थगित करने में खुद कांवड़ संघों ने पहल की|

लेकिन दूसरी तरफ केरल जहां प्रतिदिन 13000 से 16000 हजार तक कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं, जहां पॉजिटिविटी रेट 10% से ज्यादा है तथा राज्य में लॉकडाउन लगा हुआ है, उस केरल की सीपीएम की सरकार ने बकरीद मनाने के लिए लॉकडाउन में 3 दिन की ढील देने का निर्णय लिया है|

इस पर किसी को आपत्ति नहीं है| ना राजनीतिक पार्टियों को, ना सिविल सोसायटी को और न कांवड़ यात्रा पर हंगामा खड़ा करने वाली मीडिया को| उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा पर स्वतः संज्ञान लेने सुप्रीम भी केरल को लेकर खामोश है| यही है भारत का सेकुलरिज्म| 

जो मीडिया कावड़ यात्रा को लेकर के हंगामा मचाए हुए था वह केरल सरकार के इस निर्णय पर चुप्पी साधे हुए हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है|

जो मीडिया, तथाकथित सिविल सोसाइटी एवं बुद्धिजीवी वर्ग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उनकी सरकार के पीछे पढ़ा हुआ था वह केरल की सरकार एवं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को लेकर के चुप्पी साधे हुए है|

कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में दो राज्य केरल एवं महाराष्ट्र सबसे फिसड्डी एवं नकारा साबित हुए हैं| लेकिन मीडिया से लेकर के अदालतों तक ने, सब ने अपनी आंखें बंद कर रखी है| देश में कोरोना की तीसरी लहर की बात हो रही है, लेकिन इन दो राज्यों से अभी तक तो दूसरी लहर ही खत्म नहीं हुई| दूसरी लहर की शुरुआत भी इन इन्हीं राज्यों से हुई थी|

उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड की सरकार ने अच्छा किया कि इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को स्थगित कर दिया| क्योंकि देश के तथाकथित लिबरल एवं वामपंथी जमात के साथ-साथ मीडिया ने भी कांवड़ यात्राओं को कोरोना की संभावित तीसरी लहर के लिए विलन बनाने का मन बना लिया था| ठीक वैसे ही, जैसे कोरोना की दूसरी लहर के लिए हरिद्वार में आयोजित कुंभ मेला को देश एवं विदेश में विलेन साबित करने की जबरदस्त कोशिश की गई|

अब जबकि कांवड़ यात्रा स्थगित हो गई है तो अगर कोरोना की तीसरी लहर आती भी है तो इसके लिए इन्हें अपना नया विलेन ढूंढना होगा क्योंकि फिलहाल कांवड़ यात्रा को तो विलेन नहीं बना सकते|

 


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