लाल किला पर तिरंगे के अतिरिक्त कोई और झंडा फहराना देशद्रोह है

जब पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा था ठीक उसी समय देश की राजधानी दिल्ली में जो कुछ भी हुआ वह शर्मनाक था| पुर देश का जो अपमान हुआ, जिस तरह से 26 जनवरी की मर्यादा तार-तार हो गई, उसकी निंदा के लिए कोई भी शब्द छोटा पड़ जाए| वह एक तरह से एक आतंकी हरकत जैसी है|

कथित किसान आंदोलन के नाम पर दिल्ली की सड़कों पर जो अराजकता दिखी, वह किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ाने वाली देश विरोधी हरकत थी|

ट्रैक्टर से पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ी गई| अराजक तत्वों ने पुलिस के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की| पुलिस पर तलवार से हमले किए गए| लाठी-डंडों से हमले हुए, पत्थरबाजी हुई| यहां तक कि महिला पुलिसकर्मियों तक पर घेर कर हमला किया गया|

आखिर ये कैसे किसान है? जब राजपथ पर 26 जनवरी की परेड चल रही थी, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सब वही थे, ठीक उसी समय इंडिया गेट की तरफ जाने की कोशिश करना किसी आंदोलन का हिस्सा कैसे हो सकता है|

कोई भी राष्ट्रभक्त 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के कार्यक्रमो में बाधा डालने के बारे में सोच भी कैसे सकता है? अगर किसी के अंदर वह सोच है तो वह किसान नहीं है, वह राष्ट्रभक्त नहीं है| साथ ही उसके साथ वही व्यवहार होना चाहिए जो एक देशद्रोही के साथ होता है|

अराजक तत्वों द्वारा लाल किला पर कब्जा कर लेना एवं वहां पर तिरंगे के अतिरिक्त दूसरा झंडा लगाना देश किसी भी हालत में स्वीकार नहीं कर सकता| लाल किला पर झंडा फहराना कोई साधारण घटना नहीं है| इसका सांकेतिक मतलब होता है| किसी जगह पर अपना झंडा फहराने का मतलब होता है, उस जगह पर अपने नियंत्रण, अपने कब्जे, अपने विजय की घोषणा करना| इसका एक बड़ा मनोवैज्ञानिक महत्व है|

लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अतिरिक्त किसी और ध्वज की कल्पना भी कैसे की जा सकती है? लाल किला पर तिरंगा के अतिरिक्त कोई और झंडा लगाकर कोई भारत देश के अभिमान के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकता है? जिस तिरंगे के लिए हजारों लोगों ने अपने लहू दिए उस तिरंगे का अपमान कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है? लाल किले पर तिरंगा भारत की सार्वभौमिकता एवं स्वतंत्रता का प्रतीक है|

लाल किला पर तिरंगे के अतिरिक्त कोई और झंडा फहराना देशद्रोह है| इसके दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए| आंदोलन कर रहे सभी तथा कथित किसान नेताओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए| वे किसान नेता इस घटना से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते|

 


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