ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस की एक छोटी गलती बहा देती दिल्ली में खून की नदी

किसान ट्रैक्टर रैली दौरान जबरदस्त संयम दिखाते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली के बहाने की गई एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया|

पुलिस की एक छोटी सी गलती का परिणाम भयावह हो सकता था| इतना भयावह कि उसकी कल्पना मात्र भी भयभीत कर दे| एक पुलिस अधिकारी के शब्दों में जवाब आप लैंडमाइन को डिफ्यूज करते हैं तो डांस नहीं करते, एक छोटी सी गलती और लैंडमाइन ब्लास्ट कर जाता है| जब लाखों ट्रैक्टर के साथ कई लाख की भीड़ सामने हो तो वह एक लैंडमाइन से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता था| ट्रैक्टर को टैंक की तरह उपयोग किया जा रहा था| लोगों की भावनाएं उबाल ले रही थी| ऐसे में एक छोटी सी गलती भावनाओं को भड़का सकती थी| अगर ऐसा हो जाता तो पूरी दिल्ली दंगे की आग में जल जाती| जान और माल के नुकसान के बारे में अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता|

भीड़ तलवार, लाठी, डंडे, भाले, फरसा जैसे हथियारों से लैस थी| लाखों की संख्या में ट्रैक्टर थे, जिनका उपयोग टैंक के रूप में किया जा रहा था| किसी असावधानी से अगर वह भीड़ मार काट पर उतर जाती तो फिर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाता| दिल्ली की सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में लासे बिछ जाती| जिसमे ना सिर्फ दंगाई बल्कि सैकड़ों की संख्या में निर्दोष भी मारे जाते| पुलिस द्वारा हजारों - लाखों की भीड़ पर गोली नहीं चलाई जा सकती|

अगर दिल्ली पुलिस ने गलती से एक भी गोली चला दी होती तो दिल्ली में खून की नदी बन जाती| यही साजिश थी कि पुलिस से उलझो और भड़काओ ताकि वह गलती करें और गोली चला दे| एक बार अगर पुलिस की गोली से किसी प्रदर्शनकारी की मृत्यु हो जाती, तो लाखों की भीड़ को हिंसक कर दिया जाता| फिर उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को और गोलियां चलानी पड़ती|

फिर उन लाशों को आधार बनाकर विदेशों तक में नैरेटिव गढने का खेल खेला जाता| आंदोलन को पूरे देश में भड़काया जाता|

लेकिन दिल्ली पुलिस ने 26 जनवरी को अपने संयम से उस साजिस को असफल कर दिया क्योंकि लाशों की अनुपस्थिति में कोई नैरेटिव नहीं गढ़ा जा सकता| उल्टे 26 जनवरी को लाल किला पर जो हुआ, उसके बाद जनता की सहानुभूति किसान आंदोलन से चली गई है| अब इस आंदोलन का किसानों से कोई लेना देना नहीं है| आंदोलन के नाम पर जो कुछ भी पर्दे के पीछे था अब सामने आ गया है|

कुछ लड़ियाँ बिना लड़ें भी जीत ली जाती है| 26 जनवरी ट्रैक्टर रैली की लड़ाई दिल्ली पुलिस ने लड़ने से इंकार कर जीत लिया|

 


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